मामी ने दिखाया स्वर्ग का दरवाजा

हैल्लो दोस्तों मेरा नाम देव है और में दिल्ली का रहने वाला हूँ.. मेरी उम्र 25 साल की है। दोस्तों में आज ये स्टोरी लिख रहा हूँ.. ये मेरे और मेरी एक मामी ज़ी के साथ हुए सेक्स अनुभव के बारे में है। दोस्तों मेरे मामा की शादी 2005 में हुई और मेरी मामी (sexy mami) बहुत अच्छी हैं और देखने में बहुत सुंदर हैं। उनका साईज़ है 36-25-34 और उनकी उम्र 28 साल की है।

मामा की शादी के वक़्त जब वो पहली बार ससुराल आई तभी से मैंने उनसे दोस्ती कर ली थी वैसे भी आप जानते हैं कि जब नई दुल्हन आती है तो उसका ख़ास ध्यान रखा जाता है.. तो यहाँ भी वही होने लगा था। फिर में भी इस काम में सभी का साथ देता था क्योंकि मुझे मामी के साथ वक़्त बिताने का मौका मिलता था और मामी भी मुझसे बातें करके पूरे दिन टाईम पास कर लेती थी। फिर ऐसे ही हमारी दोस्ती हो गयी और हम लोग खाना भी साथ खाने पीने लगे।

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फिर बाद में क्योंकि मेरे कॉलेज की पढ़ाई का चक्कर था तो मुझे एक सप्ताह के बाद वहाँ से दिल्ली वापस आना पड़ा मेरी फेमिली यहीं दिल्ली में ही है और मामा जी का घर कानपुर में है। फिर यहाँ से में मामी जी से अक्सर फोन पर बातें किया करता था और फिर धीरे धीरे मैंने उनसे एक अच्छे दोस्त का रिश्ता बना लिया था। फिर उनकी शादी में मुझे उनकी एक दोस्त भी बहुत पसंद आई और में अक्सर मामी से कहता था कि प्लीज मेरी उससे शादी करा दो। तभी वो भी कहती थी कि हाँ करा देंगे जब सही समय आएगा। तभी इन सब बातों को करते करते हम बहुत अच्छे दोस्त हो गये थे।

फिर में अक्सर उनकी शादीशुदा लाईफ की फेमिली प्लानिंग के बारे में भी बातें कर लिया करता था। उन बातों पर कभी वो शरमाती तो कभी सीधा सा जवाब देती और मजाक़ में कहती थी कि तुम्हारी शादी होने दो.. फिर देखेंगे तुम क्या क्या प्लानिंग करते हो। फिर ऐसे ही वक़्त गुज़रता गया और फिर करीब 8-10 महीने के बाद मैंने छुट्टियों पर एक प्लान बनाया और फिर मामा जी के घर पर पहुँच गया।

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इस बार मेरे पास बहुत टाईम था वहाँ पर रुकने और उनसे बातें करने का और फिर घर पहुँच कर सभी फेमिली सदस्य से मिला.. नानी, मामा, कज़िन्स, सभी बहुत खुश हुए मुझे अचानक देखकर और में भी लेकिन मुझे ज़्यादा खुशी थी मामी जी से मिलने की और उनके साथ वक़्त बिताने की। मेरे मामा स्कूल टीचर हैं। तो वो सुबह जल्दी जाते और शाम को आते और जब खाली समय मिलता तो कभी खेती बाड़ी में भी टाईम दिया करते थे।

फिर मामा मामी की शादीशुदा लाईफ बहुत अच्छी चल रही थी और वो दोनों एक दूसरे के साथ खुश थे और आज भी हैं नानी, मौसी और सभी फेमिली सदस्य वहीं पर एक ही मकान में रहते थे और खेती के काम में लगे रहते थे और गावं में वैसे भी कोई ना कोई काम रहता ही है.. मामी भी घर के काम करती हैं लेकिन ज़्यादा नहीं.. वो सीधे काम करती थी। फिर वो अक्सर अपने रूम में ही समय बिताती हैं और में भी ऐसे ही समय का इंतज़ार करता था कभी किचन में उनके साथ बातें करता जब वो खाना बना रही होती या फिर बाद में उनके रूम के आस पास मंडराता रहता और इसी बीच वो मुझसे बातें करने के लिए रूम में बुला लेती।

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फिर कभी कभी तो लंच हम साथ में ही करते थे और वो भी एक पड़ी लिखी लड़की हैं और में भी ठीक ठाक हूँ तो अन्य लोगों की तुलना में हमारी बहुत अच्छी बनती थी। फिर हम उनके बेड पर ही बैठकर लंच करते थे और कई बार उन्होंने मुझे अपने हाथों से खाना खिलाया हैं और मुझे बहुत मज़ा आता था।

फिर ऐसे ही एक दिन लंच टाईम में मामी नहाने के बाद तैयार हुई.. वही डेली की तरह तैयार होना। उन्होंने हरे रंग की साड़ी पहनी.. बाल खुले हुए जिनसे हल्का हल्का पानी टपक रहा था.. ब्लाउज जो ठीक ठाक ही था लेकिन इनकी हेल्थ बहुत अच्छी होने की वजह से और चार चाँद लगा रहा था.. उनका गोरा और चिकना पेट देखकर मेरे मन में हलचल मच गयी। फिर में भी नहाकर आया और मामी के कमरे में ही ड्रेसिंग टेबल के सामने तैयार हो रहा था। तभी उस समय मामी किचन में थी और में तैयार होते समय अकेला रहना पसंद करता हूँ ये बात मामी जानती है लेकिन उसी समय वो रूम में आ गयी और मुझे अपनी ब्यूटी प्रॉडक्ट्स की कीट में से क्रीम और कोई भी समान जो मुझे चाहिए हो.. ऑफर किया।

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तभी मैंने कहा कि मामी में तो सांवला हूँ मुझ पर इन ब्यूटी प्रॉडक्ट्स का कोई असर नहीं होता ये तो आप जैसे गोरी और सुंदर लडकियों के लिए बहुत अच्छी है। तभी वो बोली तुम किससे बुरे हो.. गोरा रंग ही सब कुछ नहीं होता बातचीत का भी तो फर्क होता है और तुम्हारी सोच बहुत अच्छी हैं। फिर मैंने उन्हे मुस्कुराते हुए थेंक्स कहा। फिर उन्होंने कहा कि तुम तैयार हो जाओ फिर हम साथ में लंच करेंगे। फिर लंच करते हुए वो मेरे सामने ही बेड पर बैठी थी उनकी साड़ी, लिपस्टिक, ब्लाउज के अंदर बूब्स, और चिकना पेट देखकर मेरी भूख तो वैसे ही खत्म हो जाती थी और मेरा तो दिल कर रहा था की इन्हें ही खा जाऊं। फिर मुझे ठीक से खाना ना खाते देख उन्होंने पूछा कि क्या हुआ? बताओ ना खाना क्यों नहीं खा रहे? तभी मैंने कहा कि मन नहीं है। फिर उन्होंने मुझे बहुत पूछा लेकिन में उन्हे क्या बता सकता था? फिर थोड़ी देर के बाद उन्होंने मुझे अपने हाथ से खिलाना शुरू किया। फिर उनके मुलायम हाथों से खाने में बहुत अच्छा लग रहा था.. कई बार तो मैंने उनकी उंगलियों को भी होंठो के बीच में दबा लिया और वो मुस्कुराती हुई कहती ऑश.. बदमाश खाना खाओ मेरी उंगलियाँ नहीं।

में : खाना तो मुझे खाना नहीं.. बस आपकी उंगलियों की वजह से ही में खाने की इच्छा जाता रहा हूँ।

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मामी : अच्छा जी तो खाने में नहीं.. तुम्हारी इन उंगलियों में रूचि है।

में : मुझे तो आपकी हर बात में रूचि है.. आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो। में तो आपको खा सकता हूँ लेकिन खाना नहीं।

मामी : ओह हो तो ये बात है इतनी हिम्मत है.. लगता है अब तो जल्दी ही एक अच्छी लड़की ढूंढकर तुम्हारी शादी करवानी ही पड़ेगी।

में : में तो कब से कह रहा हूँ लेकिन आप बात ही आगे नहीं बढाती।

फिर इस बात पर मामी मुस्कुराई और खाना ख़त्म किया। फिर मुझे पानी पीना था.. तभी मैंने मामी के बालों से टपकते हुए पानी को देखा जो उनके ब्लाउज के ऊपर गिर रहा था। तभी मैंने कहा कि मामी पानी.. फिर वो ग्लास देने लगी। फिर मैंने ब्लाउज की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ग्लास से नहीं वहाँ से पीना है। फिर उन्होंने मुझे मजाक में आकर मेरे गाल पर हल्का सा थप्पड़ मारा और कहा सुधर जाओ वरना मार पड़ेगी।

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