स्कूल टीचर की चुदाई

उसने ज़ोर लगाया तो मेरे सील टूटने लगी. मेरे दर्द के मारे चीख निकल गयी तौसने झट से अपने होठों से मेरे होठों को से दिया और फिर और ज़ोर से अपना लॉरा मेरी छूट में धकेलने लगा. ऐसा लग रहा था जैसे क़िस्सी ने गरम गरम लोहे की सलाख मेरी छूट में गुसेड दी हो मैं सर भी हिल्ला नहीं पा रही थी. मैं उसके बदन के नीचे कुचली पड़ी झट पता रही थी और वो था के मेरी छूट फाड़ने पे आमादा था और मेरा चेकने का हक भी चीन रहा था. लेकिन उसका मोटा लॉरा मेरी एकद्ूम टाइट कुँवारी छूट में घुस ही नहीं पा रहा था. तो उसने मेरे होठों से होंठ हटा दिए, मेरी कमर को अपने दोनों हाथों से पकड़ा और मुझे ज़ोर से अपनी तरफ खिचने लगा. मेरी टाँगें ज़ाटपटा रही थी और मैं बे-तहाशा चीकने लगी.“और छिला साली रंडी और छिला. तुझे कहा था ना के आज अगर तेरी छूट ना फरी तो एक बाप ना कहना. साली क्लास में बहुत मारती है ना!” वो बोला.“प्लीज़ मुझे छोड़ दो. आआआः! प्लीज़ इससे बाहर निकालो!” मैं गिरगिराई. desibees

चारो हासणे लगी. “अभी बोल रही है छोड़ दो. पर जब दर्द चला गया और मज़ा आने लगा तो डियर मा’आम आप ही कहोगे, मुझे छ्चोड़ड़ दो!” एक बोला.उसने तोड़ा और ज़ोर लगाया तो उसका सारे का सारा सरिया मेरी कुवारि छूट की सभी दीवारें तोड़ता हुआ मेरी छूट की गहराइयों तक चला गया. अब तोड़ा दर्द थमा. वो तोड़ा रुका. फिर उसने जब लॉरा बाहर निकलना शुरू किया तो दर्द फिर शुरू हो गया. फिर वो अपने लॉर को अंदर बाहर करने लगा. कब मेरा दर्द ख़तम हुआ, कब मेरी चीखें, गरम आहों में बदल गयी और कब मेरी छटपटा रही टाँगें खुद बा खुद उसकी कमर पर लिपट गयी, मुझे इसका पता भी नहीं चला. वो सच कह रहे थे थोड़े दर्द के बाद मुझे ऐसा मज़ा आने लगा के दिल करता था के यह ख़तम ही ना हो. और कम्बख़त यह ख़तम भी कहः हो रहा था. वो मेरे स्कूल का सबसे तकड़ा बॅस्केटबॉल प्लेयर कहाँ थकने वाला था.

पता नहीं कितनी दफ़ा मेरा पायट आकड़ा, पर जब भी आकड़ा मेरी टाँगें उसकी कमर पर कस गयी और फिर जब मैं झाड़ जाती तो मेरी टाँगें भी उसकी कमर पे ढीली हो जाती. पर वो कम्बख़त बड़ी देर बाद झाड़ा. और मेरे अंधार कहीं डोर तक झाड़ा. मुझे मेरे अंधार कहीं गरम फुवरा झुत ता ही महसूस हुआ. वो मेरे उपर गिरा, फिर संभला मुझे तोड़ा किस किया फिर मेरे उपर से हटा. मैने देखा के मेरी गांद के नीचे और आसपास की सुखी सोने रंग की घास अब मेरी छूट के खून से लालो लाल हो चुकी थी.मैं तक चुकी थी. पर अभी तो शुरुआत ही थी. वो उतरा तो दूसरा हटता कटता मेरा स्टूडेंट जिसे मैं सबसे ज़्यादा नफ़रत करती थी और जिसकी सबसे ज़्यादा और ख़तरनाक पिटाई कर ती थी वो मेरे उपर आ कर लाइट गया और मेरे गॅलन को चूमते हुए बोला, “मेरी प्यारी मेडम अभ मेरी बारी है. आज मुझे कुछ पढ़ाएँगी नही. ओह सॉरी मैं तो भूल ही गया था. आज तो मैने आपको सीखना है के अपने प्रिया स्टूडेंट की रंडी कैसे बनते है.” और उसने मेरे होठों को गहरा चूमा. वो मुझे चूम भी रहा था और एक हाथ से मेरी छाती मसल रहा था और एक हाथ से मेरी कमर से साइड को सेखलते हुए मेरी बाजू सहला रहा था. मुझसे रहा ना गया और मैं उससे लिपट

गये और उसे किस करने लगी, “आ तुम मेरे सबसे प्यारे स्टूडेंट हो गये हो आज,” पता नहीं कहाँ से मेरे मुँह से निकला. मैने उसकी छाती को किस किया तो उसने मुझे मेरे सर के बल्लों से पकड़ कर पीछे किंचा और मेरी गर्दन पर किस किया. मुझे उल्टा कर के मेरी पीठ छाती मेरी गर्दन को पीछे से किस किया. मेरे कन में भोला, “उसने तुम्हारी कुँवारी छूट फरी, तो अब मैं तुम्हारी कुँवारी गंद मारूँगा.” ऐसा कह कर उसने मुझे मेरी कमर से पकड़ कर मेरे चुटटर उपर उठा लिए. अब मैं अपने कोहनी और सरके बाल पर आगे से और घुटनों के बाल पर पीछे से थी और मेरी घंड हवा में झूल रही थी. उसने दोनो हाथों से मेरे चुटटर पाकर कर उन्हे खोका, एक उंगली को थूक लगा कर मेरी गंद पे रगड़ा. मुझे समझ नही आ रहा था की क्या हो रहा है. क्या वो वोही करने जा रहा है जो मैं सोच रही हूँ.

मैं दर गयी. मैने अपनी टाँगों के बीच मैं से मेरी गंद के पीछे लटक रही उसके दो गेंदों को देखा और उसके लॉर को देखा जो पहले वेल के लग भाग ब्राबार ही था. उसने मेरी कमर को दोनो हाथों से पकड़ा, अपना लॉरा मेरी गांद के मुँह पर रखा और मुझे अपनी और खीचा और लॉरा मेरी तरफ धकेला. मेरी चीखें निकल गयी. उसका लॉडा अभी आधा इंच भी अंदर नही गया था के मेरी गांद फॅट के हाथ में आ रही थी. मैं फूट फूट के रो रही थी और छिला रही थी. मैं घुटनों और कोहनियों के बाल आयेज भागने की कोशिश कर रही थी पर उसकी मजबूत भुजाएँ मुझे अपने लॉर की तरफ खीच रही थी.“कहाँ जा रही है मेडम मेरी जान. बड़ा दुख दिया है तुमने क्लास में आज मेरी बारी है. चल इधर आजा मेरी जान,” वो बोल्ला.जैसे कई साल लग गये हों उसके लॉर को मेरी घंड मैं घुसने में. दर्द के मारे मैं लग भाग बेहोश ही हो गयी थी. फिर उसने भी अपना लॉरा अंदर बाहर करना शुरू किया. कुछ देर बाद दर्द घटा और मुझे फिर मज़ा आने लगा. desibees kamukta

उस के एक बार झड़ने में ही मैं जाने कितनी बार झाड़ गयी. वो उत्तरा तो दूसरे दो लड़कों ने भी मुझे बरी बरी छोड़ा. पर शूकर है उन्हों ने मेरी गांद नहीं मारी. फिर चारून ने मुझ पर एक एक ट्रिप और लगाया. तब तक शाम हो चुकी थी और मैं उनके लौरों के रस से भर चुकी थी. अब मुझमे से सुबा वाली पर्फ्यूम की खुश्बू नहीं बल्कि उनके लौरों के रस की भीनी भीनी सी गंध आ रही थी.“चल अब तुझे तेरे घर के पास छोड़ दे,” मेरा एक स्टूडेंट मुझे चूमते हुए बोला.मैं उठ कर अपनी कमीज़ और प्यज़ामी की तरफ बढ़ने लगी तो मेरे से तो सीधा चल भी नही पाया जा रहा था.अरे मेडम मेरी जान अभी इतना ज़ोर मत दे कमर लचक जाएगी. एक आड़ घंटे मैं सब ठीक हो जाएगा तू चलने लायक हो जाएगी. तुझे तेरे कपड़े हम पहना देंगे.” ऐसा कह के मुझे नंगी को ही गोड मैं उठा के एक वन में ले गया. सब वन में बैठ गये और मेरे घर की तरफ चल पड़े. रास्ते में मुझे बरी बरी अपनी सीट और ड्राइवर बदल बदल कर सब ने मेरे को खूब चुस्सा.

फिर मेरे को मेरी प्यज़ामी और कमीज़ पहनाई, मेरी उँची आईडी की सॅंडल पहनाई, दुपट्टा पहनाया मेरा पारस दिया और मुझे मेरे मोहल्ले के पास छोड़ दिया. पर कम्बख़्तों ने मेरी ब्रा और पनटी नहीं लौटाई.“अरे जान यह तो हमारे पास निशानी रहेगी के हमने हमारी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत, गोरी चित्ति, और हमारे स्कूल की सबसे स्ट्रिक्ट मेडम को जाम कर छोड़ा था,” एक ने जाते जाते मुझसे कहा था. वो ब्रा और पनटी वो जब तक स्कूल से पास आउट नहीं हो गये तब तक हर रोज स्कूल मैं लाते थे और मुझे दिखा के चाड़ते थे. स्कूल से पास आउट होने के बाद भी मैं कई बार उनसे च्छूड्द चुकी हूँ. काई बार उन्होने मुझे स्कूल मैं भी मेरे रूम मैं मेरे टेबल पर छ्चोड़दा है. और उन्होने ने यह किस्सा कई जूनियर स्टूडेंट्स को भी सुनाया और मुझे उनसे इंट्रोड्यूस करवाया.

अब भी मैं अक्सर उपने किसी ना किसी स्टूडेंट्स से च्छुड्दती रहती हूँ. मैं एक रंडी टीचर बन के रह गयी हूँ. और यह सब शुरू हुआ उस दिन जिस दिन शाम को मैं अपने घर बड़ी मुश्किल से आधी तिरछी चल के पहुँची. अगर अंधेरा ना हुआ होता और कोई मुझे चलती को देख लेता तो झट सारा माजरा समझ जाता. पर इस सब का कसूरवार कौन है. desibees xxx hindi

मेरे वो लुकच्चे स्टूडेंट्स जिन्होने अपनी पिटाई का बदला लेने के लिए अपनी टीचर ही छोड़ डाली, या मैं जो अपनी जवानी और खूबसूरती की वजह से उन चारों की हवस का अंजाने में पर अपनी मर्ज़ी से शिकार बनी.