सारी रात तुमसे अपनी फ़ुद्दी की रगड़ाई करवाती

मैंने अपने कपड़े ठीक किए, फिर उसकी आवाज़ आई- जल्दी करो कोई नहीं है, जल्दी से निकाल जाओ और आधे घंटे बाद यहीं मिलना।

मैं झट से बाहर निकाल गई और शादी के समारोह में घुल मिल गई, पर उस शादी में अब मुझे कोई दिलचस्पी नहीं थी।

मुझे अब सिर्फ उस लड़के का इंतज़ार था।

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करीब 20-25 मिनट बाद वो मुझे दिखा, मैंने अपने पति और उनके दोस्त से बातें कर रही थी।

उसके हाथ में एक चाबी थी जो उसने मुझे दिखाई, मतलब उसने कमरे का इंतजाम कर लिया था।

मैंने अपने पति के कान में कहा ‘मैं अभी आई!’

और उसकी तरफ बढ़ी।

वो आगे चल पड़ा और मैं उसके पीछे।

ऊपर जाकर वो एक कमरे में घुसा तो मैं भी उसके पीछे कमरे में चली गई।

बस दरवाजा बंद होते ही उसने मुझे बाहों में भर लिया, मैं भी उससे लिपट गई।

अब तो वो मेरा था और मैं उसकी।

बिस्तर तक पहुँचते पहुँचते हम दोनों बिल्कुल नंगे हो चुके थे।

बिस्तर पे लेटते ही मैंने अपनी टांगे चौड़ी कर दी। चूत तो मेरी पहले ही पानी छोड़ रही थी, उसका लण्ड भी एकदम कड़क हो रहा था।

बस बड़े ही आराम से उसका लण्ड मेरी चूत में समा गया।

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मैंने उसे अपनी बाहों में भींच लिया और अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिये।

एक लंबे से चुम्बन के बाद मैंने उसे कहा- जितनी जल्दी हो सके मुझे चोद लो, मेरे पास ज़्यादा टाइम नहीं है।

मेरी बात सुन कर उसने अपनी जीभ निकली और मेरे मुँह में डाल दी और अपना पूरा लण्ड मेरी चूत में घुसा कर अंदर बाहर करने लगा।

मेरे ऊपर वाले होंठों में उसकी जीभ थी और नीचे वाले होंठों में उसका लण्ड यानि कि मैं दोनों तरफ से उसको चूस रही थी और वो दोनों तरफ से मुझे चोद रहा था।

वो बड़े ज़ोर से चोद रहा था और उतनी ही ज़ोर से मेरे बूब्स दबा रहा था।

मैंने कहा- दबा राजा, और ज़ोर से दबा, सच कहती हूँ तुम्हारा लण्ड लेकर ज़िंदगी का लुत्फ आ गया। ऐसा लग रहा है जैसे तुम्हारा लण्ड मेरे अंदर से मेरे दिल तक पहुँच गया हो, मार डालो मुझे आज!

‘सही कहती हो मेरी जान, मैंने भी आज तक तुम्हारे जितनी गर्म औरत नहीं देखी, लण्ड लेने की इतनी तड़प मैंने इससे पहले किसी औरत में नहीं देखी, मेरी किस्मत के मुझे तुम जैसी एक सम्पूर्ण औरत की गीली और गर्म फ़ुद्दी को चोदने का मौका मिला!

उसकी बात सुन कर मैंने भी नीचे से कमर उचकानी शुरू कर दी।

और ऐसे ही ताबड़तोड़ चुदाई करते करते मैं तो झड़ गई, मेरा सारा बदन अकड़ गया।

मैंने अपने नाखून उसके सीने में गड़ा दिये।

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जब मैं शांत हुई तो उसने पूछा- क्या तुम मेरा वीर्य पीना पसंद करोगी? मैं तुम्हारे मुँह में झड़ना चाहता हूँ।

मैंने झट से हामी भर दी।

फिर उसने मुझे बड़ी बेदर्दी और पूरी ताकत लगा कर चोदा।

जब उसका झड़ने वाला हुआ तो उसने एकदम से अपना लण्ड मेरी चूत से निकाला और मेरे मुँह में घुसेड़ दिया, थोड़ा सा चूसने पर ही उसके लण्ड से वीर्य के गरम फुव्वारे मेरे मुँह में छुट गए जिस से मेरा सारा मुँह भर गया, उसका बहुत सा वीर्य मेरे मैंने पी लिया पर फिर भी बहुत सा मेरे मुँह से बाहर चू गया।

मेरी लिपस्टिक के निशान उसके लण्ड पे लगे थे, मैंने उसका लण्ड चूसती रही और वो मेरी छातियों पे बैठा रहा, उसका बदन पसीने से भीगा पड़ा था।

वो बहुत ही संतुष्ट लगा रहा था।

मैंने कहा- अगर मुझे आज जाना न होता तो मैं सारी रात तुमसे अपनी फ़ुद्दी की रगड़ाई करवाती, पर जाना तो है, हो सका तो फिर मिलेंगे।

उसने भी हामी भरी, उसके बाद हमने अपने अपने कपड़े पहने, मैंने अपने मेकअप ठीक किया फिर से जाकर शादी के समारोह में ऐसे शामिल हो गई, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
मगर मन ही मन में मैं एक परम आनन्द महसूस कर रही थी।

इसी कहानी का दूसरा पहलू जल्दी ही प्रकाशित होगा.